चंद पंक्तियाँ किस्मत पे…


कक्षा १० | १९९३

१. किस्मत का रोना न रो ए बन्दे, कर मेहनत और खुदा तेरे साथ है |
हाथों की लकीरें धोखा हैं, जीवन का सहारा तेरे अपने हाथ हैं ||

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२. तंग गलियों में जो रहता हैं, उनको वो नीचा कहते हैं,
खुदा को अपनी जागीर, भाई-बंधू को फ़कीर समझते हैं,
ऐसे लोग यहाँ महलों में,
और वहां दोज़ख में रहते हैं ||

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मेरी कवितायेँ …सन १९९० से


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अमित कपूर