आज का नेता ( १८ साल पहले )


२४ जून, १९९६ || १२:४५

कल गलियों का जो चोर था, आज बन बैठा है नेता,
पहले तू करता था चोरी, अब डाका डाले तेरा बेटा ||

नेता बन तू देश जलाता, उस अग्नि में गोश्त पकाता,
वादे करके प्यार के, नफरत-ओ-हिंसा भड़काता ||

भूखा आदमी सड़कें बनता, तपती धूप में पसीना बहाता,
उन सड़कों पे तू शान से चलता, उनके मेहनत पर खूब उछलता ||

क्या हुआ वो वादा जो तुमने था किया?
क्या फाइलों के ढेर में दबा दिया?

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