मुस्कराओ


२९ जनवरी, १९९६

ज़िन्दगी ग़मों की राह है,
हंसोगे, तभी चल पाओगे –
इस राह में फूल कम, कांटे हैं ज्यादा,
चल तभी सकोगे, जब मुस्कराओगे ||

मुश्किलें चाहे जितनी पड़ें, तुम हँसना ना छोड़ना,
तुम ना रहोगे हमेशा – ये सोच, जीना ना छोड़ना ||

दुःख मिलें चाहे जितने, तुम हंसी बांटते रहना,
हर चेहरा जो रोता मिले, उसे ख़ुशी बांटते रहना ||

हंसी में जो नशा है, मय में वो नशा कहाँ,
खुशियाँ लुटाने में जो मज़ा है, वो आंसू दिखाने में कहाँ ?

मुस्कराहट ज़िन्दगी है, जिसे किसी-किसी ने ही जाना,
हर शख्स जो मुस्कराएगा, उसे मंजिल को है पाना ||

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